AMIT KUMAR/DELHI/DAILY INDIATIMES

Ghaziabad News: गाजियाबाद के मोरटा गांव में दो बेटियों ने फादर्स डे से पहले अपने पिता को जीवनदान देकर मिसाल पेश की है। बड़ी बेटी रिषिका ने अपनी किडनी और छोटी बेटी खुशी ने लीवर का हिस्सा दान किया।
गाजियाबाद: फादर्स डे से ठीक पहले गाजियाबाद के मोरटा गांव से एक ऐसी भावुक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। अक्सर कहा जाता है कि बेटियां परिवार की शान, सम्मान और सबसे मजबूत सहारा होती हैं, लेकिन मोरटा की दो बेटियों ने इसे अपने त्याग और समर्पण से सच साबित कर दिखाया। जब उनके पिता की जिंदगी पर संकट मंडराने लगा और डॉक्टरों ने लीवर तथा किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत बताई, तब दोनों बेटियां बिना एक पल गंवाए उनके जीवन की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर सामने आईं।
एक बेटी ने अपनी किडनी और दूसरी ने अपने लीवर का हिस्सा दान कर पिता को नया जीवन दिया। फादर्स डे से पहले दिया गया यह उपहार केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि बेटियों के असीम प्रेम, साहस और पारिवारिक मूल्यों का ऐसा उदाहरण है, जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है।
लीवर-किडनी खराब होने से बढ़ी चिंता
गाजियाबाद के मोरटा गांव निवासी 45 वर्षीय जयंत त्यागी, जो पूर्व में भाजपा के सेक्टर संयोजक भी रह चुके हैं और वर्तमान में कारोबारी हैं, पिछले करीब एक वर्ष से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। शुरुआत में सामान्य बीमारी समझकर इलाज कराया गया, लेकिन तीन महीने पहले उनकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। पेट से जुड़ी गंभीर परेशानियों के बाद जब उन्होंने अस्पताल में विस्तृत जांच कराई तो डॉक्टरों ने चौंकाने वाली जानकारी दी। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि उनकी किडनी और लीवर दोनों गंभीर रूप से प्रभावित हो चुके हैं और उन्हें बचाने के लिए जल्द से जल्द प्रत्यारोपण आवश्यक है।
डॉक्टरों की यह बात सुनकर परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। एक तरफ पिता की बिगड़ती हालत थी तो दूसरी तरफ उपयुक्त डोनर की तलाश की चुनौती। परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन था।
बेटियों ने लिया पिता को बचाने का संकल्प
इस मुश्किल घड़ी में जयंत त्यागी की दोनों बेटियां परिवार की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आईं। हाल ही में बीटेक की पढ़ाई पूरी करने वाली 22 वर्षीय रिषिका त्यागी ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी एक किडनी पिता को दान करने का निर्णय लिया। वहीं बीटेक प्रथम वर्ष की छात्रा 19 वर्षीय खुशी त्यागी ने भी अपने पिता को लीवर का हिस्सा देने की इच्छा जताई।
परिजनों के अनुसार जब परिवार ने बेटियों से इस फैसले को लेकर दोबारा सोचने को कहा तो उनका जवाब बेहद भावुक कर देने वाला था। दोनों बेटियों ने साफ कहा कि अगर पिता ही नहीं रहेंगे तो बाकी सब कुछ अर्थहीन हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मां अंगदान करती हैं और उनकी तबीयत प्रभावित होती है तो पूरे परिवार की जिम्मेदारी कौन संभालेगा। बेटियों की इसी सोच ने परिवार को भी भावुक कर दिया।
रिषिका के फैसले को मिला ससुराल का साथ
इस पूरे घटनाक्रम का एक और भावुक पहलू बड़ी बेटी रिषिका से जुड़ा है। रिषिका की शादी आने वाले कुछ महीनों में होने वाली है। ऐसे में परिवार को आशंका थी कि कहीं यह फैसला उनके वैवाहिक जीवन को प्रभावित न कर दे। लेकिन जब रिषिका ने अपने होने वाले ससुराल पक्ष को अंगदान के बारे में बताया तो वहां से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
रिषिका के होने वाले ससुराल वालों ने न केवल उनके फैसले का समर्थन किया बल्कि उनका हौसला भी बढ़ाया। उन्होंने कहा कि माता-पिता के लिए इतना बड़ा त्याग करने वाली बेटी वास्तव में प्रेरणा है और उन्हें इस बात पर गर्व है कि ऐसी बहादुर बेटी उनके परिवार का हिस्सा बनने जा रही है।
जांच के बाद बेटियां बनीं उपयुक्त डोनर
जयंत त्यागी के इलाज के दौरान डॉक्टरों ने परिवार के कई सदस्यों की चिकित्सीय जांच की। उद्देश्य यह था कि प्रत्यारोपण के लिए सबसे उपयुक्त डोनर की पहचान की जा सके। सभी परीक्षणों और मेडिकल प्रक्रियाओं के बाद यह स्पष्ट हुआ कि रिषिका और खुशी दोनों अपने पिता के लिए सबसे उपयुक्त डोनर हैं।
इसके बाद लंबी काउंसलिंग, कानूनी औपचारिकताओं और मेडिकल मंजूरियों की प्रक्रिया पूरी की गई। परिवार के लिए यह समय मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन दोनों बेटियां अपने फैसले पर अडिग रहीं।
नोएडा के अस्पताल में सफलतापूर्वक हुआ ट्रांसप्लांट
सभी तैयारियों के बाद नोएडा के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने जटिल ट्रांसप्लांट सर्जरी को अंजाम दिया। यह ऑपरेशन कई घंटों तक चला और इसमें किडनी तथा लीवर प्रत्यारोपण की प्रक्रिया एक साथ पूरी की गई।डॉक्टरों के अनुसार ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। वर्तमान में जयंत त्यागी और उनकी छोटी बेटी खुशी डॉक्टरों की निगरानी में आईसीयू में भर्ती हैं, जबकि रिषिका की हालत सामान्य बताई जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि सभी की रिकवरी अच्छी चल रही है और जल्द ही दोनों बेटियों को अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।
बेटियों के साहस को सलाम कर रहा पूरा गांव
जयंत त्यागी के छोटे भाई अमित रंजन के अनुसार शुरुआत में परिवार बेटियों के स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर चिंतित था, लेकिन दोनों के दृढ़ निश्चय के सामने सभी को झुकना पड़ा। बेटियों का केवल एक ही उद्देश्य था, किसी भी कीमत पर अपने पिता की जान बचानी है।ऑपरेशन के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता भी अस्पताल पहुंचे और जरूरत पड़ने पर रक्तदान किया। भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल सहित संगठन और गांव के लोगों ने दोनों बेटियों के साहस, त्याग और समर्पण की खुलकर सराहना की है।





