राजस्थान में लगातार तीसरे साल लड़कियों के मुकाबले लड़कों के स्कूल छोड़ने की दर अधिक रही है। UDISE+ 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा 9वीं के बाद 8.4% लड़कों ने पढ़ाई छोड़ी, जबकि लड़कियों का आंकड़ा 6.5% था।
Vishnu Agrawal/NEWS EDITOR/DAILY INDIA TIMES NEWSPAPER

जयपुर: आमतौर पर माना जाता है कि सामाजिक बंधनों और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण लड़कियां पढ़ाई बीच में छोड़ देती हैं, लेकिन राजस्थान से सामने आए शिक्षा के ताजा आंकड़े इस धारणा को पूरी तरह पलट रहे हैं। केंद्र सरकार की ताजा UDISE+ 2025-26 की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में लगातार तीसरे साल लड़कियों की तुलना में लड़कों के स्कूल छोड़ने की दर कहीं अधिक दर्ज की गई है। कक्षा 9वीं के बाद यानी माध्यमिक स्तर पर यह खाई सबसे ज्यादा गहरी नजर आ रही है।
लड़कियां पढ़ रही हैं आगे, लड़के हो रहे हैं पीछे
रिपोर्ट के चौकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि साल 2025-26 में कक्षा 9 से 12 के बीच लड़कों की ड्रॉपआउट दर 8.4% रही, जबकि लड़कियों के लिए यह आंकड़ा 6.5% था। यह कोई एक साल का ट्रेंड नहीं है, इससे पिछले साल (2024-25) भी 6% लड़कों के मुकाबले 5.2% लड़कियों ने स्कूल छोड़ा था, और साल 2023-24 में भी लड़कों का ड्रॉपआउट रेट 10.6% और लड़कियों का 8.0% था। तीनों साल के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि स्कूल से लड़कों का मोहभंग तेजी से हो रहा है।
कमाई के दबाव’ ने छीनीं किताबें?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लड़कों के इस तरह स्कूल छोड़ने के पीछे की वजह कोई सामाजिक बंदिश नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूरी और रोजगार को लेकर छाई निराशा है। स्कूली शिक्षा विशेषज्ञ के.बी. कोठारी के अनुसार, पिछले दो-तीन सालों में बच्चों के सीखने के स्तर में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। ऐसे में जब माता-पिता देखते हैं कि स्कूल जाने के बावजूद बच्चे की पढ़ाई में सुधार नहीं हो रहा, तो वे उसे आगे पढ़ाने के बजाय छोटी-मोटी नौकरी या मजदूरी में लगाना बेहतर समझते हैं ताकि परिवार को थोड़ी आर्थिक मदद मिल सके।
राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है राजस्थान
इस रिपोर्ट ने राजस्थान की पूरी स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक प्रदेश का ड्रॉपआउट रेट राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है।
कक्षा 3 से 5: राष्ट्रीय औसत 1.8 के मुकाबले राजस्थान का ड्रॉपआउट रेट 3.6 है
।कक्षा 6 से 8: राष्ट्रीय औसत 3.6 के मुकाबले प्रदेश का आंकड़ा 4.6 है।
कक्षा 9 से 12: राष्ट्रीय औसत 7 के मुकाबले राजस्थान में यह 7.5 है।
7,200 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे
लड़कों के ड्रॉपआउट के अलावा रिपोर्ट ने राज्य के ढांचागत संकट को भी उजागर किया है। प्रदेश में एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या एक साल में 6,117 से बढ़कर 7,200 हो गई है, जिनमें 1.78 लाख छात्र सिर्फ एक गुरुजी के भरोसे पढ़ रहे हैं। सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह है कि राजस्थान में 140 स्कूल ऐसे भी हैं जहां पढ़ने वाला एक भी छात्र नहीं है, लेकिन वहां 189 शिक्षकों की तैनाती मजे से चल रही है।





