VIJAY KUMAR/DAILY INDIATIMES NEWSPAPER

श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी पर RLP सांसद हनुमान बेनीवाल का गुस्सा फूटा। सीएम भजनलाल सरकार पर निशाना साधते हुए अपराधियों को चौराहे पर फांसी देने का कानून बनाने की मांग की।
श्रीगंगानगर में एक 13 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक गलियारों में भारी आक्रोश है। इस संवेदनशील और झकझोर देने वाली घटना पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के राष्ट्रीय संयोजक और सांसद हनुमान बेनीवाल का गुस्सा फूट पड़ा है। हनुमान बेनीवाल ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक कड़ा और भावुक संदेश जारी किया है, जिसमें उन्होंने देश के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और राजस्थान के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को टैग करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार पर हमला बोला है। सांसद ने साफ शब्दों में कहा कि एक अबोध और मासूम बच्ची को कई दिनों तक कुछ दरिंदों द्वारा हैवानियत का शिकार बनाया जाता रहा और स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी, जो मरुधरा की कानून व्यवस्था की बेहद चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है।
शर्मसार करने वाली घटना, जंगलराज का प्रमाण’
सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपने जारी किए गए संदेश में लिखा कि श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ जो बर्बरता और दरिंदगी हुई है, उसने पूरे राजस्थान के आत्मसम्मान को देश के सामने शर्मसार कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक मासूम बच्ची को लगातार कई दिनों तक बंधक बनाकर हैवानियत का शिकार बनाया जाता रहा, लेकिन स्थानीय खुफिया तंत्र और पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सोते रहे।
सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस पूरे प्रकरण को प्रदेश में प्रशासनिक विफलता का सबसे भयावह उदाहरण बताते हुए कहा कि इस तरह के अपराधों का लगातार सामने आना राज्य में प्रशासनिक नियंत्रण की कमी को साबित करता है।
पुलिस और स्थानीय प्रशासन क्या कर रहे थे?
आरएलपी सांसद ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सवाल पूछते हुए कहा कि वे सरकार से यह जानना चाहते हैं कि आखिर श्रीगंगानगर के होटलों के भीतर इस तरह का घिनौना और संगठित अपराध कैसे फल-फूल रहा था? जब होटलों में इस तरह के अवैध और अमानवीय कृत्य हो रहे थे, तब स्थानीय पुलिस प्रशासन, आबकारी विभाग और अन्य जिम्मेदार अधिकारी व एजेंसियां क्या सोई हुई थीं?
बेनीवाल ने मांग की है कि केवल मुख्य आरोपियों को पकड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि इस पूरे गिरोह को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण देने वाले रसूखदारों, चेकिंग में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों और इस पूरे मामले में मिलीभगत रखने वाले हर छोटे-बड़े व्यक्ति के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई कर उन्हें सस्पेंड किया जाना चाहिए।
पीड़िता की जिम्मेदारी उठाए राज्य सरकार
संवेदनशील मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए हनुमान बेनीवाल ने मांग की है कि पीड़ित मासूम बच्ची इस समय बेहद गहरे मानसिक और शारीरिक सदमे से गुजर रही है। इसलिए राज्य सरकार को बिना किसी देरी के आगे आकर पीड़िता के पूरे इलाज, भविष्य के पुनर्वास और उसके मानसिक स्वास्थ्य को दोबारा ठीक करने के लिए बेहतरीन काउंसलर्स की व्यवस्था करने की पूरी वित्तीय और सामाजिक जिम्मेदारी उठानी चाहिए।
इसके साथ ही, इस केस की संवेदनशीलता को देखते हुए मामले की रोजाना सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाए ताकि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द और समयबद्ध तरीके से न्याय मिलना सुनिश्चित हो सके।
चौराहे पर फांसी देने का कानून बनाना अत्यंत आवश्यक
सांसद हनुमान बेनीवाल ने कानून व्यवस्था में बड़े बदलाव की वकालत करते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी लोक सभा के भीतर देश के कानून में संशोधन करने की आवाज उठाई थी। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों से भी इस बात को दोहराया है और आज वे फिर से इसी बात पर जोर दे रहे हैं कि मासूम बच्चों के साथ इस तरह की जघन्य दरिंदगी और खिलवाड़ करने वाले अपराधियों के मन में कानून का खौफ पैदा करने का अब एक ही रास्ता बचा है। सरकार को तत्काल प्रभाव से ऐसा सख्त और कड़ा कानून बनाना चाहिए जिससे ऐसे दरिंदों को सीधे चौराहे पर सरेआम फांसी की सजा दी जा सके।





