
VISHNU AGARWAL EDITOR DAILY INDIATIMES DIGITAL JOURNALISM PLATFORM
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक्स पर वीडियो साझा कर बताया कि गत माह राजस्थान दौरे के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बस बॉडी बिल्डर्स से मुलाकात की। वीडियो में कारीगरों ने बताया कि बसों में आग कंपनियों की घटिया चेसिस वायरिंग और यूरिया सिस्टम के कारण लगती है, लेकिन दोष लोकल बिल्डर्स पर मढ़ दिया जाता है।
जयपुर: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के राजस्थान दौरे से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण और खोजी वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है। इस वीडियो को लेकर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की है। अशोक गहलोत ने लिखा, ‘गत माह राजस्थान दौरे पर पधारे नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी ने यहां बसों की बॉडी बनाने वालों से बात की और उनकी खूबियों तथा समस्याओं को जाना।’
इस वीडियो में राहुल गांधी जयपुर के लोकल बस और ट्रक बॉडी बिल्डर्स की फैक्ट्री का औचक दौरा करते और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कारीगरों व छोटे उद्यमियों के हुनर और उनके संकटों को गहराई से समझते नजर आ रहे हैं।
चलती बसों में आग लगने का असली सच क्या है?
अक्सर हाईवे पर चलती बसों में आग लगने की घटनाओं का ठीकरा लोकल बॉडी बिल्डर्स पर फोड़ दिया जाता है। लेकिन इस वीडियो में कारीगरों ने राहुल गांधी के सामने इसका असली कारण उजागर किया। कारीगरों ने बताया कि आग लगने की मुख्य वजह ऑटोमोबाइल कंपनियों से मिलने वाली चेसिस की घटिया क्वालिटी की वायरिंग होती है, जिससे शॉर्ट सर्किट होता है।
‘कंपनियां खुद को बचाने के लिए ब्लेम छोटे लोकल बिल्डर्स पर डाल रही
इसके अलावा, गाड़ियों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगा ‘यूरिया सिस्टम’ कभी-कभी 500 से 600 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो जाता है। इसके फटने से भयानक आग लगती है, लेकिन कंपनियां खुद को बचाने के लिए इसका ब्लेम छोटे लोकल बिल्डर्स पर मढ़ देती हैं। सुरक्षा के दावों पर बिल्डर्स ने दिखाया कि वे बसों में सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखते हैं और 1 के बजाय 3 से 5 इमरजेंसी एग्जिट गेट लगाते हैं।
राहुल गांधी ने की ‘फेरारी’ और ‘रोल्स-रॉयस से तुलना
वीडियो में राहुल गांधी इन कारीगरों के हाथ के हुनर को देखकर दंग रह गए। जहां बड़ी कंपनियां गाड़ियों में फाइबर का इस्तेमाल करती हैं, वहीं ये कारीगर लोहे की शीट को 100 से 200 बार हथौड़े से पीटकर हाथ से बेंड करते हैं, जो बेहद मजबूत और सुरक्षित होता है। इस अद्वितीय हुनर को देखकर राहुल गांधी ने उनकी हौसलाअफजाई करते हुए कहा कि ‘दुनिया की सबसे महंगी और लक्जरी कारें जैसे Ferrari और Rolls-Royce भी इसी तरह हाथ के हुनर से बनती हैं। आपका यह ‘हथौड़ा छाप’ हुनर असल में देश की लक्जरी और मजबूती की निशानी है।’
बड़ी कंपनियों को बढ़ावा और छोटे उद्योगों का दर्द
बातचीत के दौरान कारीगरों ने सरकारी नीतियों को लेकर अपना दर्द भी बयां किया। उनका आरोप है कि सरकार और परिवहन मंत्रालय की नीतियां केवल वोल्वो जैसी बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों को बढ़ावा दे रही हैं, जबकि छोटे MSMEs को सरकारी टेंडर या सपोर्ट नहीं मिल पाता। हालांकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने लाइसेंस फीस कम या जीरो करने की बात कही थी, लेकिन ग्राउंड पर अब तक कोई एक्शन नहीं हुआ है। उल्टा पुराने नियमों को अचानक बदलकर छोटे व्यापारियों पर दबाव बनाया जा रहा है।
नाथद्वारा और उदयपुर मिलकर साल में 1200 बसें बनाते हैं’
कारीगरों ने बताया कि सिर्फ राजस्थान के नाथद्वारा और उदयपुर मिलकर साल में 1200 बसें बनाते हैं यह एक ऐसी क्षमता है जो देश की किसी एक बड़ी फैक्ट्री के पास भी नहीं है। राहुल गांधी ने इन कारीगरों को आश्वासन दिया कि वे देश के इस अनमोल हुनर और अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इन छोटे उद्योगों की आवाज को केंद्र सरकार के सामने पूरी मजबूती से उठाएंगे।





